रिश्तों की शर्तें

रिश्तों की थी कुछ ऐसी शर्तें

जिनको हम अपना न सके ।

गैरों को भी बनते देखा दोस्त

हम अपनों से भी निभा ना सके ।

आंसू बहा लिये, जी हल्का हो गया

गम को फिर भी भुला ना सके ।

वक्त ने तराशा, ढल गए हम

दाग चेहरे से अपने मिटा ना सके ।

लिखा कुछ, शायद बन गया कुछ

गीत अपने ही गा ना सके ।

कोशिश की लाखों , सहा कांटो को

चमन अपना महका न सके ।


51 thoughts on “रिश्तों की शर्तें

  1. फिर कल होगा , एक नया सवेरा /
    फिर वापस हम जुट जाते है //
    बिगड़े रिश्ते ,बिगड़ी बातो को /
    वापस फिर से सुलझाते है //

    उस बीते पुराने वक़्त को लेकर /
    क्यों नए आँशु बहते हो ??
    एक नयी हसी चेहरे पैर खिलकर /
    चलो एक नया कल लिख जाते है //
    🙂 🙂

    Liked by 7 people

  2. Heart rendering poetry,it’s very true .We are finding it difficult to keep relationships as it should be because of certain conditions. The true fact is that there should not be any conditions in relationships ,I mean in true love there is only one condition that is either live for love or die for it in any circumstances. Thanks a lot for sharing. 🌹👍

    Liked by 1 person

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