रिश्तों की शर्तें

रिश्तों की थी कुछ ऐसी शर्तें

जिनको हम अपना न सके ।

गैरों को भी बनते देखा दोस्त

हम अपनों से भी निभा ना सके ।

आंसू बहा लिये, जी हल्का हो गया

गम को फिर भी भुला ना सके ।

वक्त ने तराशा, ढल गए हम

दाग चेहरे से अपने मिटा ना सके ।

लिखा कुछ, शायद बन गया कुछ

गीत अपने ही गा ना सके ।

कोशिश की लाखों , सहा कांटो को

चमन अपना महका न सके ।


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43 thoughts on “रिश्तों की शर्तें

  1. फिर कल होगा , एक नया सवेरा /
    फिर वापस हम जुट जाते है //
    बिगड़े रिश्ते ,बिगड़ी बातो को /
    वापस फिर से सुलझाते है //

    उस बीते पुराने वक़्त को लेकर /
    क्यों नए आँशु बहते हो ??
    एक नयी हसी चेहरे पैर खिलकर /
    चलो एक नया कल लिख जाते है //
    🙂 🙂

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