A Tribute to John Abraham Lincoln

Today, 15th April, Was the day when John Abraham Lincoln was assinated in a theatre. John Abraham Lincoln was a great leader. He was the one who understood leadership as a skill and a great quality. Today, all the leaders of the land understand leadership as a profession. I think he was the one such … Continue reading A Tribute to John Abraham Lincoln

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सूख रही स्याही कविता से……..

कैसे बुनू बिंबों के जाल कैसे खींचू शब्दों के छाल मिथक ढूंढू क्यों अतीतगत दंतकथा क्यों खोजू कालातीत। क्या है यही कलेवर कविता का ? यह जैसे माया रूप हो बनिता का छल लेती है सभ्य जनों को माया बंधन में बांध गई सबको। शब्द फांस नहीं बनते मुझसे भावना है उस दीन के लिए। … Continue reading सूख रही स्याही कविता से……..

मैं कहता सुरझावनहारी

आज मैं आपके समक्ष मनु -स्मृति लेकर आई हूं। जिसमें आक्रांताओं के प्रभाव में हमारे ही पंडितों और पुरोहितों ने इतनी मिलावट कर दी है कि उसे जाति विशेष का पोषक माना जाता है। संस्कृत भाषा के मर्म को जानने के कारण मुझे इस के कथनों में विरोधाभास स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है। कारण … Continue reading मैं कहता सुरझावनहारी

सच्चिनंद हीरानंद वात्स्यायन (अज्ञेय)

‘ शेखर एक जीवनी ' , ' नदी के द्वीप ' , ' अपने अपने अजनबी ' , हरी घास पर क्षण भर ’ , ‘ कितनी नावों में कितनी बार ' जैसी प्रमुख कृतियों के रचनाकार सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘ अज्ञेय ' का जन्म 7 मार्च 1911 को उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में … Continue reading सच्चिनंद हीरानंद वात्स्यायन (अज्ञेय)